अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध : भारत का स्‍टैंड और कांग्रेस की सोच

अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के बीच भारत में भी घमासान मचा हुआ है। यहां शिया समुदाय के लोग जगह जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि कांग्रेस नेता जमकर बयानबाजी कर रहे हैं। इनकी सुप्रीमो सोनिया गांधी केंद्र की चुप्‍पी पर सवाल उठा रही हैं ? कह रहीं हैं – ईरान के राष्‍ट्रपति अयातुल्‍ला खुमैनी की हत्‍या पर भारत सरकार की चुप्‍पी गंभीर संदेह पैदा कर रही है। राहुल गांधी ने भी पूछा है, क्‍या मोदी खुमैनी की हत्‍या का समर्थन करता है? राशिद अल्वी ने कहा, शक है कि प्रधानमंत्री के मशवरे पर ईरान पर जंग हुई है। अजीब सवाल है। हमारी प्राथमिकता राष्‍ट्रवाद, पहले होनी चाहिए न कि ऐसे मौके पर राजनीति करना। कांग्रेस किसका साथ दे रही है ?

तेहरान भारत का कितना समर्थक रहा है, पहले हमें यह जानना चाहिए? खुमैनी के बयान और तकरीरें कोई भी ले लीजिए, उनका बयान भारत के साथ नहीं रहा। सितंबर 2024 में खुमैनी के बयान पर चर्चा करते हैं। उन्‍होंने कहा था, हम खुद को मुसलमान नहीं कह सकते जब तक म्‍यनमार, गाजा और भारत में मजलूम मुसलमानों से नहीं जुड़ते। भारत में मुसलमानों पर जुल्‍म हो रहे हैं। दिल्‍ली में वर्ष 2020 में जो दंगे हुए उस पर उनका कहना था, यह मुसलमानों का कत्‍लेआम है। कश्‍मीर पर वर्ष 2019 पर उनका बयान आया था। यहां से धारा 370 हटाना मुसलमानों के साथ अन्‍याय है। वर्ष 2017 में खुमैनी ने दुनियाभर के मुसलमानों से आह़वान किया था कि कश्‍मीर के मजलूम मुस्‍लमानों के साथ खड़े हों। यह स्‍टैंड ईरान का भारत के साथ रहा है। इसके अलावा, दिल्‍ली में इजराइल के अंबेसडर की पत्‍नी के वाहन पर बम लगाया गया था। उसमें एक पत्रकार का नाम सामने आया था। और वह पत्रकार ईरान से जुड़ा हुआ था। इसका विश्‍व बिरादरी में ज्‍यादा शोर न मचे, भारत सरकार ने इसे रफादफा करवा दिया था।
अब बात करते हैं कितने भारतीय गल्‍फ देशों में रहते हैं। यूएई में 44 लाख भारतीय रहते हैं। सऊदी में साढ़े 27 लाख कुवैत में रहते हैं 10 लाख, कतर में साढ़े आठ लाख, ओमान में साढ़े छह लाख और बहरीन में साढ़े तीन लाख भारतीय रहते हैं। और इन सभी गल्‍फ देशों पर ईरान बमबारी कर रहा है। जबकि ईरान में मात्र साढे दस हजार भारतीय रहते हैं। मेरे अनुसार- इन साढ़े दस हजार में से भी अधिकतर वह हो सकते हैं जो वहां के मदरसों में पढ़ रहे होंगे। या किसी न किसी तरह से खुमैनी की विचाधारा का समर्थन करते होंगे। अब आप तय कीजिए जिस देश में 44 लाख भारतीय रहते हों, और जहां मात्र साढे़ दस हजार भारतीय रहते हों। हमारी प्राथमिकता संबंध सुधारने की किस देश से पहले होनी चाहिए। हालांकि, हमारी ईरान के साथ भी सहानुभूति होनी चाहिए। और इसके लिए विदेशमंत्री जयशंकर ने वहां के विदेशमंत्री से बात भी की है।
ट्रेड की बात करें तो यूएई से हमारा सालाना सौ बिलियन डॉलर का व्‍यापार होता है। सऊदी से 42 बिलियन डॉलर। अमेरिका से 132 बिलियन डॉलर। ईरान से मात्र 1.8 बिलियन डॉलर सालाना व्‍यापार होता है। ऐसे में हमें पहले किससे बात करनी चाहिए यह आप तय कर सकते हैं। और कांग्रेस नेता की सोच क्‍या है ? और इसके नेता किस राह पर चल रहे हैं ? यह आपके सामने है।