संगठनात्मक ढांचा बदलने की तैयारी में संघ, गांवों में शाखाएं खोलने की तैयारी
पानीपत। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) शताब्दी वर्ष में अपने सांगठनिक ढांचे में व्यापक बदलाव करने जा रहा है। प्रांत की व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। साथ ही प्रांत प्रचारक का पद भी समाप्त कर दिया जाएगा। प्रत्येक राज्य में एक ही राज्य प्रचारक होगा। राज्य में आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से संभाग होंगे। अभी तक संभाग की व्यवस्था नहीं थी।
पटटी कल्याणा स्थित माधव सृष्टि केंद्र में चल रही संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के दूसरे दिन शनिवार को सांगठनिक व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा। संघ प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई। रविवार को निर्णय लेकर व्यवस्था में परिर्वतन की घोषणा की जाएगी। संघ ने पूरे देश को कामकाज की सुविधा के लिहाज से 11 क्षेत्र और 46 प्रांत में बांट रखा है। अब उत्तर क्षेत्र, पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र, पश्चिम क्षेत्र, मध्य क्षेत्र, दक्षिण क्षेत्र, दक्षिण मध्य क्षेत्र, पूर्व क्षेत्र, असम, उत्तर पूर्व क्षेत्र होंगे। प्रत्येक प्रांत में एक प्रचारक और एक सह प्रचारक है। ये पद समाप्त कर दिए जाएंगे। प्रत्येक संभाग में छह विभाग होंगे। और उनके अलग अलग प्रचारक बनाए जाएंगे। एक तरह से संभाग प्रांत की जगह लेंगे। यूपी में पहले छह प्रांत थे। अब छह संभाग होंगे। एक ओर प्रस्ताव गांवों में शाखाएं खोलने पर जोर दिया गया है। इसके तहत बड़ी संख्या में शाखाएं खोली जाएंगी।
नागपुर के बाद सबसे महत्वपूर्ण केंद्र होगा पटटी कल्याणा
संघ की बैठक में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पानीपत के पटटी कल्याणा स्थित माधव सृष्टि केंद्र को उत्तर भारत का सबसे प्रमुख केंद्र बनाए जाने का है। यह नागपुर के बाद सबसे महत्वपूर्ण केंद्र होगा। माधव सृष्टि केंद्र करीब 25 एकड़ में है। यह दिल्ली से चंडीगढ़ एनएच-44 पर समलखा के पटटी कल्याणा गांव में है। आरएसएस के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने आठ साल पहले इसकी आधारशिला रखी थी। इसका नाम दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोवलकर के नाम पर रखा गया है।
