शोध-जल्दी बूढ़ा न बना दे उम्र बढ़ने का डर

देहरादून।

उम्र को लेकर अत्यधिक चिंता करना केवल मानसिक तनाव का कारण नहीं बनता, बल्कि यह शरीर को भी तेजी से बूढ़ा कर सकता है। यह दावा एक नए शोध में किया गया है। 700 से अधिक महिलाओं पर किए गए शोध में पाया गया कि जो महिलाएं बढ़ती उम्र को लेकर अधिक चिंतित थीं, उनके रक्त में जैविक रूप से तेजी से बूढ़ा होने के संकेत दिखाई दिए। आमतौर पर कई वयस्क उम्र बढ़ने को लेकर चिंतित रहते हैं। इस चिंता के पीछे बीमारियों का खतरा, शारीरिक क्षमता में कमी और दूसरों पर निर्भर हो जाने की आशंका जैसे कारण होते हैं।

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ग्लोवल पब्लिक हेल्थ की पीएचड़ी शोधार्थी और साइकोन्यूरोएंडोक्रिनोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित इस शोध की प्रमुख लेखिका मारियाना रोड्रिग्स के अनुसार, ‘बुढ़ापे से जुड़ी चिंता सिर्फ मनोवैज्ञानिक समस्या नहीं है, बल्कि इसके शरीर पर भी गंभीर शारीरिक प्रभाव पड़ सकते हैं।’ हालांकि, वैज्ञानिक अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि उम्र बढ़ने की चिंता और जैविक रूप से तेजी से बूढ़े होने

की प्रक्रिया के बीच सीधा संबंध है या नहीं। फिर भी शोध के निष्कर्ष दोनों के बीच महत्वपूर्ण संबंध की ओर संकेत करते हैं। रोड्रिग्स बताती हैं कि मध्यम आयु की महिलाएं अक्सर एक साथ कई जिम्मेदारियां निभाती हैं। इनमें अपने बच्चों की देखभाल के साथ-साथ वृद्ध माता-पिता की देखभाल भी शामिल है। जब वे अपने बुजुर्ग परिजनों को बढ़ती उम्र के साथ सेहत संबंधी समस्याओं व शारीरिक कमजोरियों का सामना करते देखती हैं, तो उनके मन में भी भविष्य को लेकर आशंकाएं बढ़ने लगती हैं कि कहीं भविष्य में उनके साथ भी ऐसा ही न हो जाए। यदि यह चिंता लंबे समय तक बनी रहे, तो इसका असर शरीर की जैविक प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। इसलिए बढ़ती उम्र को लेकर अनावश्यक चिंता करने के बजाय स्वस्थ जीवनशैली, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच अपनाना फायदेमंद हो सकता है।