भाजपा के गढ़ मंडी में बल्ह कैसे हारी पार्टी, नतीजों के बाद विधायक की मुश्किलें बढ़ी

 

मंडी। हिमाचल प्रदेश में मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र में राजनीतिक ऊंट किस करवट बैठेगा, इसे लेकर अंदरखाते बिसात बिछनी शुरू हो गई है। कभी गुटबाजी के दलदल में धंसी कांग्रेस अब यहां एकसूत्र’ में बंधती नजर आ रही है, जिसने भाजपा के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। अंदरूनी कलह से बेपटरी हुई भाजपा में अब वर्तमान विधायक इंद्र सिंह गांधी के बड़बोलेपन और हालिया पंचायती राज चुनाव में मिली करारी हार का ठीकरा फूटने की पूरी तैयारी हो चुकी है। स्थिति को भांपते हुए भाजपा नेतृत्व ने इस बार बल्ह से किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतारने की गुप्त व्यूहरचना तैयार कर ली है।

पंचायत व निकाय चुनाव में मिली हार
बल्ह की नेरचौक नगर परिषद सहित रिवालसर नगर पंचायत में भी भाजपा की हार हुई। पंचायत समिति में बहुमत के बावजूद अध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित सदस्य काबिज नहीं हो पाया। जिला परिषद चुनाव में भी 3 में से 2 सीटें गंवा दीं।

जब दिग्गज मिले, तो बदले समीकरण
बल्ह में कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी गुटबाजी रही है, जिसके कारण पिछले दो चुनावों से पार्टी को शिकस्त झेलनी पड़ रही थी। लेकिन इस बार सियासी समीकरण 180 डिग्री घूम चुके हैं। पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी और कभी उनके खासमखास रहे एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया के बीच पिछले दो चुनाव में छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर था। उधर, जल प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष शशि शर्मा ने भी अपनी अलग राह पकड़ रखी थी। पार्टी हित में अब इन सभी दिग्गजों ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक ही नाव पर सवार होने का फैसला किया है। कांग्रेस की इसी एकजुटता का नतीजा रहा कि हालिया स्थानीय निकाय व पंचायती राज चुनावों में भाजपा को चारों खाने चित होना पड़ा।

विधायक के बयानवीर अंदाज से फजीहत

एक तरफ कांग्रेस एकजुट हो रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा विधायक इंद्र सिंह गांधी की अपनी ही जुबान उनके लिए जी का जंजाल बन गई है। क्षेत्र में चर्चा है कि विधायक का बड़बोलापन पार्टी की लुटिया डुबोने पर आमादा है। हाल ही में उनका 20 दांत और 40 गोलियों वाला विवादित बयान मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक खूब सुर्खियों में रहा, जिससे शीर्ष नेतृत्व को भारी फजीहत झेलनी पड़ी थी।

नए चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी, पुराने कार्यकर्ताओं ने खोला मोर्चा
अंदरखाते विधायक की कार्यप्रणाली से नाराज पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं ने अब बगावती तेवर अपना लिए हैं और यह बात सीधे हाईकमान तक पहुंचा दी गई है। यही वजह है कि भाजपा अब नए और साफ-सुथरी छवि वाले चेहरों पर दांव खेलने का मन बना रही है।

इस समय टिकट की दौड़ में तीन बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं। इनमें आइजीएमसी शिमला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक रहे डा. रमेश चंद, पूर्व मंत्री स्व.चौधरी पीरू राम की पौत्रवधु सुमन चौधरी और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजय धीमान शामिल हैं। इन तीनों ही दावेदारों ने फील्ड में अपनी सक्रियता बढ़ाकर मोर्चा संभाल लिया है।

बहरहाल, बल्ह की राजनीति अब उस मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहां कांग्रेस की एकजुटता और भाजपा की अंदरूनी कलह आने वाले दिनों में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर का संकेत दे रही है।