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September 2, 2026

फर्जी बीएड डिग्री से नौकरी पाने वाले शिक्षक को पांच साल की सजा, अब तक 28 वर्ष की सजा

रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग में फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी करने के मामले में एक और फर्जी शिक्षक को सजा सुनाई गई है। जनता इंटर कॉलेज देवनगर में तैनात रहे लक्ष्मण सिंह रौथाण पुत्र केदार सिंह रौथाण को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार सैनी की अदालत ने पांच वर्ष के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न अदा करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त चार माह की सजा भुगतनी होगी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार लक्ष्मण सिंह रौथाण ने वर्ष 2003 की फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर शिक्षक की नौकरी प्राप्त की थी। जब मामले की जांच की गई तो चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से प्राप्त रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि उसके नाम से कोई भी बीएड डिग्री विश्वविद्यालय द्वारा जारी नहीं की गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग एवं एसआईटी जांच के आधार पर शिक्षक को निलंबित कर बर्खास्त कर दिया और उसके विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत हुआ। न्यायालय ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत पांच वर्ष की सजा और 10,000 के जुर्माने से, और धारा 471 के तहत दो वर्ष की सजा और 5,000 के जुर्माने से दंडित किया। आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारावास पुरसाड़ी भेजा गया है।

सरकारी पक्ष की ओर से प्रभारी पैरवी अभियोजन अधिकारी प्रमोद चंद्र आर्य ने की। उन्होंने बताया कि रुद्रप्रयाग जिले में अब तक कुल 28 फर्जी शिक्षकों को न्यायालय द्वारा दोषी ठहराकर कारावास की सजा दी जा चुकी है। इस पूरे प्रकरण में शिक्षा विभाग की लापरवाही भी उजागर हुई है, क्योंकि बिना दस्तावेज सत्यापन के न केवल नियुक्तियां की गईं, बल्कि उन्हें स्थायीकरण और प्रोन्नति भी दी गई। न्यायालय ने शिक्षा विभाग के गैर जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के लिए आदेश की प्रतिलिपि सचिव शिक्षा एवं सचिव गृह उत्तराखंड को प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।