अब जापान में भी निरंजनी का अखाड़ा, ताजपोशी

हरिद्वार। जापान का युवा उद्यमी सनातन परंपरा के अनुसार अब संत जीवन व्‍यतीत करेगा। 14 नवंबर को पंचायती अखाड़ा निरंजनी में विधिवत पटटाभिषेक कर युवा संत को महामंडलेश्‍वर की उपाधि दी गई। इस पहले के लिए संतों ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्‍यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज की प्रशंंसा की।

जगदगुरु शंकराचार्य स्‍वामी राजराजेश्‍वराश्रम महाराज ने कहा कि अब जापान में भी सनातन का परचम लहराएगा। इसके अलावा अन्‍य देशों में भी हमारी सनातन परंपरा का आकर्षण बढ़ेगा। अपने संबोधन में जगदगुरु ने श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज को आद्य जगदगुरु शंकराचार्य का सच्‍चा अनुयायी बताया। उन्‍होंने कहा, इस समय देश विदेश में विभिन्‍न तरह की घटनाएं हो रही हैं। लेकिन, जैसे जैसे विश्‍व में सनातन का आकर्षण बढ़ेगा, शांति स्‍थाापित होगी। सनातन से जुड़ने पर मानव , जात पात से ऊपर उठ जाता है। वे सिर्फ मानव कल्‍याण की बात करता है। और यही अब विश्‍व को चाहिए। और हमारा सनातन सिर्फ यही सिखाता है।