हिमाचल में 3500 करोड़ से बनेगा आपदा-रोधी इंफ्रास्ट्रक्चर: सीएम सुक्खू

 

शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुक्सान को कम करने और राज्य को सुरक्षित बनाने के लिए 3,500 करोड़ रुपए की लागत से आपदा-रोधी आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी। शिमला स्थित हिप्पा संस्थान में आयोजित टुवर्ड्स रेजिलिएंस इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग इन हिमालय कार्यशाला के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा, भौगोलिक संवेदनशीलता के कारण राज्य में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है। उन्होंने आपदा प्रबंधन और सरकार के प्रयासों को लेकर मुख्य बातें सांझा की।

2023 की भीषण आपदा के दौरान राज्य में फंसे 75,000 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 की भीषण आपदा के दौरान राज्य में फंसे 75,000 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया। चंद्रताल क्षेत्र से 300 पर्यटकों को सुरक्षित निकालने के लिए उन्होंने प्रदेश सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि 2023 की आपदा में करीब 23,000 मकान नष्ट हुए थे और 51 लोगों की जान गई थी। सरकार ने राहत नीति बदलते हुए पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों का मुआवजा 1.30 लाख रुपए से बढ़ाकर 8 लाख रुपए किया। उन्होंने कहा कि 2023 के अनुभवों के कारण सरकार ने वर्ष 2025 की आपदा का बेहतर तरीके से सामना किया, जिससे नुक्सान अपेक्षाकृत कम रहा। उन्होंने बादल फटने की बढ़ती घटनाओं को जलवायु परिवर्तन और बड़े बांधों के जलाशयों से बढ़ते वाष्पीकरण से जोड़ा।

सीएम ने किया विशेष रिपोर्ट का विमोचन
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हाइड्रो-मैट्रोलॉजिकल आपदाओं पर तैयार की गई एक विशेष रिपोर्ट का विमोचन किया। इसके साथ ही उन्होंने हिमाचल सोशल इम्पैक्ट असैसमैंट मैनेजमैंट सिस्टम (एसआईएयू पोर्टल) भी लॉन्च किया। यह पोर्टल बेहतर डाटा आधारित निर्णय लेने, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और प्रशासनिक कार्यों को प्रभावी बनाने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों ने आपदा प्रबंधन पर दिया जोर
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, संवेदनशील हिमनदीय झीलों की निगरानी और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग इंजीनियरिंग मानकों पर बल दिया। मुख्य सचिव केके पंत ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ क्षतिग्रस्त ढांचे का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वीके पॉल ने वैश्विक तापमान वृद्धि को एक गंभीर चेतावनी बताते हुए सभी विभागों के सहयोग से व्यापक नीति अपनाने की आवश्यकता जताई।