उत्तराखंड में चीनी जमाखोरी पर नकेल, 15 दिन का ही स्टॉक रख सकेंगे बड़े व्यापारी
देहरादून। उत्तराखंड में लोगों को चीनी की कमी न झेलनी पड़े। जमाखोरी के माध्यम से इसके दाम न बढ़ जाए। इसका ध्यान रखते हुए सरकार ने स्टॉक को लेकर अब सख्त व्यवस्था लागू कर दी है। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने प्रदेश के सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत बड़े थोक खरीदार अपनी जरूरत के मुताबिक अधिकतम 15 दिन का चीनी स्टॉक अपने पास रख सकेंगे। इससे अधिक मात्रा में चीनी का भंडारण पाए जाने पर संबंधित कारोबारी या संस्थान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्टॉक सीमा का नियम उन बड़े खरीदारों पर लागू होगा, जो उत्पादन, उपभोग या कच्चे माल के तौर पर हर महीने 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक चीनी की खपत करते हैं। ऐसे खरीदारों को अपने गोदाम में 15 दिन की आवश्यकता से ज्यादा चीनी जमा करने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य जरूरत से अधिक स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।
सरकार ने निगरानी का दायरा केवल कारोबारियों के गोदामों तक सीमित नहीं रखा है। चीनी मिलों से बड़े उपभोक्ताओं को हर महीने कितनी चीनी बेची गई, इसका भी सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा जिला स्तर पर समय-समय पर गोदामों में मौजूद चीनी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। इससे कागजों में दर्ज स्टॉक और वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर की भी जांच की जा सकेगी।
सरकार का मानना है कि जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने से बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है और इसका असर कीमतों पर पड़ सकता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और जमाखोरी पर अंकुश लगाना है। चीनी की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की रसोई के साथ-साथ मिठाई, बेकरी, होटल, चाय-कॉफी और दूसरे खाद्य कारोबारों पर भी पड़ता है।
खाद्य आयुक्त बीएल राणा के अनुसार केंद्र सरकार के निर्देशों से प्रदेश के सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। अधिकारियों को स्टॉक की निगरानी करने और निर्धारित सीमा का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
