नाग पंचमी (29 जुलाई ): काल दोष दूर करने का दिन
देहरादून। कालसर्प योग होने पर नाग पंचमी के व्रत, रुद्राभिषेक, नाग पूजन का विधान होता है। मान्यता है , महादेव की उपासना से नाग देवता कालसर्प योग के श्राप से मुक्त करते हैं।
श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी को नागों की उत्पति हुई थी। इसलिए इसे नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। कहीं यह कृष्ण पक्ष की पंचमी को भी मनाई जाती है। शास्त्र कहते हैं कि इस दिन की पूजा के प्रभाव से नागों का भय नहीं रहता। काल से संबंधित सभी दोषों का नाश होता है। कालसर्प दोष की शांति के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है। इस दिन सर्प देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करें और ध्यान करें।
वास्तव में, कालसर्प योग में जन्म लेने वाले जातक के जीवन का पूर्वार्द्ध बेहद कष्टों से भरा होता है, लेकिन उत्तरार्द्ध यानी 48 वर्ष की आयु के बाद उसे यश-कीर्ति खूब मिलती है। जैसा कि आप जानते हैं कि ब्रहमांड में 12 राशियां, 9 ग्रह और जन्म कुंडली के 12 भावों में ग्रह स्थिति आदि के कारण कालसर्प योग के प्रभावों को बांटा गया है। इस तरह कालसर्प योग 12 प्रकार के होते हैं। इनका निवारण कराने से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। किसी भी उपाय को कराने से पहले कालसर्प योग की स्थिति जरूर जान लें।
कैसे कर सकते हैं पूजा
कालसर्प योग का प्रभाव होने पर नाग पंचमी के व्रत, रुद्राभिषेक, नाग पूजन का विधान है। भगवान शिव की उपासना करने से नाग देवता कालसर्प योग के श्राप से मुक्त करते हैं। शिव मंदिर में रुद्राक्ष माला से ओउम नम: शिवाय का जाप करें। शिवलिंग पर तांबे का सर्प चढ़ाएं। लोहे या चांदी का सर्प जोड़ा बनवाकर पूजा जरूर करें। मान्यता है इस दिन सात अनाज, काले तिल, नीला वस्त्र, नारियल दान करने से दोष को कम किया जा सकता है। पित्रोंं का आहवान करें। नाग को नमन करते हुए प्रार्थना करें कि उनके पितरों को मोक्ष मिले। उसके बाद नदी में पूजा की सामग्री और सर्प जोड़ा विसर्जित करें। इसके अलावा यदि किसी महिला की कुंडली में यह दोष है तो वह नाग पंचमी के दिन वट वृक्ष की 108 प्रदक्षिणा करे। इस दिन नवनाग स्त्रोत का पाठ भी करना चाहिए।
