आईटीआर : समय पर नहीं भरा तो क्या होगा?
देहरादून, 4 अगस्त (दून पोस्ट)। आयकर रिर्टन दाखिल करने की नियत तारीख के उल्लंघन के परिणामों पर चर्चा करने से पहले, आइए-पहले यह समझें कि आपके लिए आयकर रिर्टन दाखिल करने की तय तारीखें कौन -कौन सी हैं ? सामान्य श्रेणी के करदाताओं के लिए, जिसमें सभी वेतनभोगी व्यक्ति शामिल हैं, उनके लिए आयकर रिर्टन दाखिल करने की नियत तारीख 31 जुलाई होती है। वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए आयकर रिर्टन दाखिल करने की नियत तारीख 31 जुलाई 2025 थी। जिसे इस वर्ष के लिए बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दिया है। जिन लोगों का व्यवसाय अथवा पेशा है और उनके खातों का ऑडिट आवश्यक है उनके लिए आईटीआर दाखिल करने की नियत तारीख अभी हाल पिफलहाल 31 अक्तूबर 2025 है। पार्टनरशिप फर्म में कार्यरत भागीदारों के लिए भी, यदि फर्म के खातों का टैक्स ऑडिट होना है तो नियत तारीख 31 अक्तूबर 2025 होगी। इसके अलावा जिन व्यवसायियों पर ट्रांसफर प्राइसिंग के प्रावधान लागू होते हैं उनके लिए नियत तारीख 30 नवंबर 2025 है। यदि आप कोई व्यवसाय या पेशा चला रहे हैं लेकिन, आपके खातों का किसी अन्य कानून के तहत ऑडिट आवश्यक नहीं है तो 31 मार्च 2025 को समाप्त होने वाले लेखा वर्ष के लिए आईटीआर दाखिल करने की नियत तारीख 15 सितंबर 2025 ही है।
समय पर रिर्टन भरने से चूके तो क्या करें
टैक्स एंड इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट हरसेवक सिंह ने कहा, यदि आप 15 सितंबर 2025 तक अपना आईटीआर दाखिल करने में विफल रहते हैं तो आप इसे 31 दिसंबर 2025 तक भी दाखिल कर सकते हैं। लेकिन, इसके बाद बिल्कुल नहीं। यदि आपके पास पिछले साल में कोई नुकसान है जिसे आप अगले वर्षों की कर योग्य आय के साथ समायोजित करने के लिए आगे ले जाने के हकदार है तो यदि आप नियत तारीख तक आईटीआर दाखिल करने में विफल रहते हैं तो आप ऐसे नुकसानों को आगे ले जाने का दावा नहीं कर पाएंगे। इसी तरह यदि आप रिफंड के हकदार हैं तो आपके कारण होने वाली देरी की अवधि के लिए रिफंड पर ब्याज खो देंगे। यदि टीडीएस और एंडवास टैक्स का कुल योग आपकी टैक्स देनदारी से कम है तो आपको देरी की अवधि के लिए शुद्ध देय कर राशि पर ब्याज देना होगा। यदि पूर्ण टैक्स देनदारी का भुगतान अग्रिम कर या टीडीएस के माध्यम से नहीं किया गया है तो आपको दोहरा ब्याज देना होगा। पहला, वित्तीय वर्ष की 31 मार्च से आगे कर भुगतान में देरी के लिए और दूसरा नियत तारीख से आईटीआर दाखिल करने की वास्तविक तारीख तक की देरी के लिए।
कई बार भर सकते हैं संशोधित रिर्टन
टैक्स एंड इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट हरसेवक सिंह का कहना है कि यदि आपके द्वारा पहले ही दाखिल किए गए आईटीआर में आपको कोई गलती दिखाई देती है तो आप आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख यानी 31 दिसंबर 2025 तक कई बार संशोधित आईटीआर दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए आयकर विभाग आपको पूरा मौका देता है कि आप अपने रिटर्न में बदलाव एवं संशोधन कर सकें।
200 फीसदी तक जुर्माना
यदि आप 31 दिसंबर 2025 तक भी अपना आईटीआर दाखिल करने में विफल रहते हैं और आयकर विभाग को इसका पता चल जाता है तो विभाग टैक्स की राशि का 50 फीसदी या 200 फीसदी का जुर्माना लगा सकता है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह आय की कम रिपोर्टिंग का मामला है या गलत रिपोर्टिंग का । इसके अतिरिक्त, यदि बचाए गए कर की राशि दस हजार रुपये से अधिक है तो आयकर विभाग आपके खिलाफ आईटीआर दाखिल नहीं करने के लिए मुकदमा भी दर्ज कर सकता है। जेल की अवधि कर की राशि के आधार पर तीन माह से सात वर्ष तक हो सकती है। यदि आप अंतिम तारीख चूक जाते हैं तो आप एसेसमेंट वर्ष के अंत से 48 महीनों के भीतर कुछ शर्तों के अधीन एक अपडेट आईटीआर दाखिल कर सकते हैं। लेकिन, अपडेट आईटीआर दाखिल करने की तारीख के आधार पर आपको दंडात्मक टैक्स देना होगा। अंतिम तारीख तक आईटीआर दाखिल करने में विफल रहने वाले सभी करदाता अपडेटेड आईटीआर दाखिल नहीं कर सकते हैं।
