चिंतपूर्णी मंदिर विकास मामला: शिमला हाईकोर्ट की सुक्खू सरकार को चेतावनी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने धार्मिक स्थल माता श्री चिंतपूर्णी जी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, विस्तार और पार्किंग व्यवस्था से जुड़े मामलों में सुस्त कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय आदेशों का पालन नहीं किया गया, तो कोर्ट जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए मजबूर होगा। यह आदेश कोर्ट द्वारा ”जनहित याचिका और इससे जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई के दौरान जारी किए गए।
सुनवाई के दौरान ऊना के डिप्टी कमिश्नर की ओर से कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया गया। इस रिपोर्ट में बताया गया कि मंदिर परिसर के पास उपलब्ध पार्किंग स्थलों की सूची तैयार कर ली गई है। इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसर से करीब 2 किलोमीटर दूर भारी वाहनों की पार्किंग के लिए सरकारी भूमि की पहचान की जा चुकी है। इस जमीन को माता श्री चिंतपूर्णी जी मंदिर ट्रस्ट के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और ट्रांसफर होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
प्रशासन ने कोर्ट को सूचित किया कि मंदिर ट्रस्ट परिसर से सटी जमीन को अधिग्रहित करने की प्रक्रिया में है। इसके लिए स्थानीय दुकानदारों के साथ बातचीत चल रही है। इस जमीन का उपयोग मंदिर परिसर के विस्तार और सौंदर्यीकरण के लिए किया जाएगा, जहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विश्राम गृह, पीने का पानी, शौचालय और नई पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
याचिकाकर्ता और मध्यस्थों ने कहा कि’सिर्फ कागजों पर काम’ हो रहा है। याचिकाकर्ता रजनीश खोसला ने प्रशासन के दावों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने दलील दी कि कई महीने बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई प्रगति या काम नजर नहीं आ रहा है। वहीं, मामले से जुड़े अन्य मध्यस्थों ने भी डीसी ऊना की स्टेटस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई और कोर्ट से काम में लापरवाही बरतने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
वरिष्ठ वकीलों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि 30 दिसंबर 2024 को जारी किए गए पुराने आदेशों का तय समय सीमा के भीतर पालन नहीं किया गया और न ही हलफनामे में भूमि अधिग्रहण के मौजूदा चरण की स्पष्ट जानकारी दी गई है।
अदालत ने सरकारी पक्ष को सचेत करते हुए कहा कि यदि अगली सुनवाई तक जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो जिम्मेदार अधिकारियों को गंभीर कानूनी नतीजों का सामना करना पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को तय की गई है।
