ईपीएफओ में चेहरे से पहचान के नियम को अनिवार्य करने पर उद्योग एवं संस्‍थान संघ ने जताई चिंता

नई दिल्‍ली (10 अगस्‍त)। उद्योग एवं संस्‍थान संघ नई दिल्‍ली ने श्रम मंत्रालय से कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) के उस हालिया निर्देश पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, जिसमें यूनिवर्सल अकाउंट नंबर बनाने के लिए चेहरे से पहचान के नियम को अनिवार्य किया गया है।
संघ का कहना है कि उन उद्योगों में जहां उच्‍च क्षरण, कम डिजिटल साक्षरता और स्‍मार्टफोन की पहुंच सीमित है, वहां इस नियम में नियोक्‍ताओं को परिचालन संबंधी कार्यों में बाधा उत्‍पन हो रही है।

श्रम एवं रोजगार मंत्री को लिखा पत्र
7000 से अधिक सदस्‍यों वाले इस उद्योग निकाय ने श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया को पत्र लिखकर सरकार से यूएएन बनाने के लिए उमंग ऐप और एकीकृत नियोक्‍ता पोर्टल को समानांतर विकल्‍प के रूप में बनाए रखने का आग्रह किया है।
इस संघ में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम, लघु एवं मध्‍यम उद्यम और बहुराष्‍ट्रीय निगम शामिल हैं। संगठन ने ईपीएफओ के 30 जुलाई के परिपत्र को उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से समस्‍याग्रस्‍त बताया है जहां कर्मचारियों की संख्‍या में भारी कमी, स्‍मार्टफोन की सीमित पहुंच और डिजिटल साक्षरता कम है।

यूएएन आवंटन केवल उमंग ऐप से
यह आदेश एक अगस्‍त से प्रभावी है और इसके तहत यूएएन आवंटन केवल उमंग ऐप के माध्‍यम से ही किया जाएगा। उमंग या नए जमाने के शासन के लिए एकीकृत मोबाइल एप्‍लीकेशन और सरकार द्वारा विकसित एक मोबाइल प्‍लेटफार्म है जो नागरिकों को एकल, उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस के माध्‍यम से केंद्र और राज्‍य और चुनिंदा निजी क्षेत्र की सेवाओं की एक श्रृंखला तक निर्बाध पहुंच प्रदान करता है। सरकार के मुताबिक इस नीति का उद़ेदश्‍य कार्यप्रवाह को सुव्‍यवस्थित करना और पहचान सत्‍यापान को बढ़ाना है।
उधर, एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि इसके व्‍यापक अनुपालन चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इसने सरकार से एक सुगम परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए ई पहुंच बिंदु बनाए रखने का आग्रह किया है।