हिमाचल प्रदेश में सरकारी राशन पर महंगाई की जोरदार मार, 3 साल में कितने बढ़ गए दाम ?
शिमला। हिमाचल प्रदेश में आखिर महंगाई की मार सरकारी राशन तक भी पहुंच गई है। प्रदेश में राशनकार्ड धारकों को सस्ती दर पर मिलने वाली दालों और खाद्य तेलों के दाम पिछले तीन सालों में कई बार बेहताश बढ़े हैं। अप्रैल 2023 से अब तक (वर्ष 2026) एपीएल के लिए दाल चना 34 रुपये प्रति किलो तक महंगा हो चुका है। जबकि दाल उड़द साबुत 29 रुपये और फोर्टिफाइड सरसों तेल के दाम में 13 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हो चुकी है।
विधायक त्रिलोक जम्वाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने बताया कि एनएफएसए और अंत्योदय श्रेणी में दाल चना अप्रैल 2023 में 22 रुपये प्रति किलो मिलता था, जबकि अब उसकी कीमत 61 रुपये हो गई है। यानी उपभोक्ताओं को एक किलो चने के लिए तीन साल पहले के मुकाबले 39 रुपये अधिक देने पड़ रहे हैं।
उड़द और सरसों तेल ने आमजनों पर बढ़ाया बोझ
दाल उड़द साबुत की कीमत भी इस अवधि में बढ़ी है। एनएफएसए श्रेणी में अप्रैल 2023 में इसकी कीमत 58 रुपये प्रति किलो 92 रुपये पहुंच गई। एपीएल में यह 68 से बढ़कर 97 रुपये और विभागीय आंकड़ों में इस दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव भी दर्ज हुआ है।
सरसों तेल के भाव बढ़ते जा रहे
खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाला फोर्टिफाइड सरसों तेल भी महंगा हुआ है। एनएफएसए श्रेणी में इसकी कीमत 142 से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर एपीएल में 147 से बढ़कर 160 रुपये हुई है। फोर्टिफाइड सोया रिफाइंड तेल की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। एनएफएसए श्रेणी व एपीएल श्रेणी की कीमत 104 से बढ़कर 135 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
मलका दाल का भाव
दाल मलका की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई। एनएफएसए श्रेणी में 54 से 67 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गए हैं। एपीएल का रेट 2023 में 64 रुपए था जो 72 रुपये पहुंच गया है।
विभाग के अनुसार इन खाद्य वस्तुओं की खरीद बाजार दरों के आधार पर की जाती है। दालों की खरीद केंद्र की मूल्य समर्थन और मूल्य स्थिरीकरण योजनाओं के तहत होती है, जबकि खाद्य तेल और नमक की खरीद ई-टेंडर के माध्यम से की जाती है। कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन, मांग और आपूर्ति के कारण बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहता है।
