Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

August 30, 2026

कौन थीं तीलू रौतेली ? जिनके नाम पर उत्‍तराखंड सरकार 20 साल से दे रही पुरस्‍कार

 

देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध वीरांगना तीलू रौतेली का जन्म 8 अगस्त 1661 को पौड़ी गढ़वाल जिले के चौंदकोट परगने के गुराड़ गांव में हुआ था। उन्हें ‘गढ़वाल की झांसी की रानी’ भी कहा जाता है। मात्र 15 वर्ष की उम्र में तीलू ने तलवारबाजी और घुड़सवारी सीखी। उसके बाद पिता, दो भाइयों और मंगेतर की शहादत का बदला लेने के लिए सेना का नेतृत्व किया। कत्यूरी आक्रमणकारियों के खिलाफ सात साल तक तीलू ने लगातार युद्ध लड़ा और 13 गढ़ों पर विजय हासिल की। और अंत में अपने प्राणों की आहुति देकर वीरगति को प्राप्त हुई।

युद्ध भूमि में पराक्रम
सबसे पहले तीलू ने खैरागढ़ (वर्तमान कालागढ़ के समीप) को कन्त्यूरों से मुक्त करवाया। उसके बाद उमटागढ़ी पर धावा बोला। फिर, वह अपने सैन्य दल के साथ “सल्ड महादेव” पंहुची और उसे भी शत्रु सेना के चंगुल से मुक्त करवाया। चौखुटिया तक गढ़ राज्य की सीमा निर्धारित कर देने के बाद तीलू अपने सैन्य दल के साथ देघाट वापस लौटीं। कालिंका खाल में तीलू का शत्रु से घमासान लड़ाई हुई। सराईखेत में कन्त्यूरों को परास्त करके तीलू ने अपने पिता के बलिदान का बदला लिया। इसी जगह पर तीलू की घोड़ी “बिंदुली” भी शत्रु दल के वारों से घायल होकर तीलू का साथ छोड़ गई।

अंतिम बलिदान
शत्रु को पराजय का स्वाद चखाने के बाद जब तीलू रौतेली लौट रही थी। कुछ देर विश्राम करने के लिए वह पानी के एक स्रोत के पास बैठ गई। कांडा गाँव के ठीक नीचे पूर्वी नयार नदी में पानी पीते समय उसने अपनी तलवार नीचे रख दी । और जैसे ही वह पानी पीने के लिए झुकी, पास छुपे हार से अपमानित रामू रजवार नामक एक कन्त्यूरी सैनिक ने तीलू की तलवार उठाकर उस पर जोरदार हमला कर दिया। निहत्थी तीलू पर पीछे से छुपकर किया गया वह वार प्राणान्तक साबित हुआ। इतिहासकारों के अनुसार, तीलू ने मरने से पहले अपनी कटार के वार से उस शत्रु सैनिक को मौत के घाट उतार दिया था।

वर्ष 2006 से हर साल दिया जा रहा पुरस्‍कार
वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार उत्तराखंड सरकार द्वारा 8 अगस्‍त वर्ष 2006 से हर साल दिया जा रहा है। यह पुरस्कार राज्य की महिलाओं और किशोरियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया जा रहा है। उनकी याद में उनके जन्मस्थल व बीरोंखाल (कांडा मल्ला) क्षेत्र में हर साल कौथिग (मेले) और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। अब सरकार खेल, समाजसेवा, साहित्य और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए महिलाओं और किशोरियों को तीलू रौतेली पुरस्कार से पुरस्कृत करती है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए विभाग को विभिन्न जिलों से इस बार 217 आवेदन मिले थे।

8 अगस्‍त 2026 को इन्हें मिलेगा तीलू रौतेली पुरस्कार
-उत्तरकाशी की श्वेता बधानी (स्वतंत्री) को सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए
-अल्मोड़ा की पुष्पा फर्त्याल को संस्कृति एवं कला के क्षेत्र में
-बागेश्वर की दया दानू को समाज सेवा
-चमोली की नंदा सती को संगीत
-चंपावत की रितिका बगोली को पर्यावरण संरक्षण एवं शिक्षा
-देहरादून की नीतू रानी को शिक्षा एवं बहादुर
-हरिद्वार की वैशाली शर्मा को समाज सेवा
-नैनीताल की लतिका को खेल क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि
-पौड़ी गढ़वाल की प्रियंका पत थपलियाल को खेल समाज सेवा एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में
-पिथौरागढ़ की कलावती देवी को सामाजिक कार्य
-रुद्रप्रयाग की दुर्गा देवी को समाज सेवा
-टिहरी गढ़वाल की सरिता कोठियाल को सामाजिक क्षेत्र
-ऊधम सिंह नगर की पुष्पा देवी को दिव्यांग खेल

किस जिले से कितने आवेदन
इसमें अल्मोड़ा से 21, बागेश्वर से आठ, चमोली और चंपावत से 12-12, देहरादून से 23, हरिद्वार से 22, नैनीताल से 29, पौड़ी से आठ, पिथौरागढ़ से 13, रुद्रप्रयाग से 11, टिहरी से 13, ऊधमसिंह नगर से 11 और उत्तरकाशी जिले से विभाग को 24 आवेदन थे। इसमें से 13 महिलाओं का चयन किया गया है। जबकि राज्यस्तरीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार के लिए विभाग को प्रदेश भर से 220 आवेदन मिले। पुरस्कार के लिए इसमें से 35 महिलाओं का चयन किया गया है।
प्रदेश के प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए 13 महिलाओं का चयन किया गया है। पुरस्कार वितरण आठ अगस्त को संस्कृति विभाग के हरिद्वार बाईपास मार्ग स्थित सभागार में किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चयनित महिलाओं को पुरस्कृत करेंगे। इसके अलावा 35 महिलाओं को राज्य स्तरीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार दिया जाएगा।